क्यों निराश हुआ जाए?

हर अंधेरे को पार कर जाऊंगी, बादलों का सीना चीर जाऊंगी; जो करदे रोशन मेरे इस जहां को, ‘मैं’ वो चांद ढूंढ लाऊंगी।                     – अंजू वैश्य

वो जीत के 21 साल……..

शत शत नमन है उन वीरों को जिसने खून बहाया। कारगिल विजय दिलाकर भारत का मान बढ़ाया।। 

कारगिल विजय दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं एवम् बधाई। वन्दे मातरम् 🙏

रिश्ता वहीं,सोच नई 💕

रक्षाबंधन का वो पर्व जो भाई बहन के प्रेम का प्रतीक है।इस दिन हर बहन अपने भाई की कलाई पर राखी का धागा इस आशा और विश्वास के साथ बांधती है कि उसका भाई किसी भी परेशानी में और जीवन के हर मोड़ पर सहायता करेगा और हर भाई भी एक ज़िम्मेदार व्यक्ति होने के नाते अपनी हर बहन को यह वचन देता है और अपनी बहन से यह उम्मीद करता है की वह आपने जीवन के हर राज में उसे शामिल करेगी।लेकिन आज के दौर मे सामाजिक बुराइयां इतनी बढ़ गई हैं कि हर भाई और बहन परेशान है और इसके लिए हम ही ज़िम्मेदार हैं क्योंकि कभी – कभी समाज के डर से लड़कियां अपने भाइयों से बातें छिपाती हैं साथ ही कुछ भाई जो मान- सम्मान अपनी बहनों को देते है वह दूसरी लड़कियों को नहीं। अतः इस राखी मेरा यही निवेदन है कि हर भाई राखी बंधवाते समय उस बहन में देश की सभी बहेनों की छवि देखें और हर बहन अपने भाई में देश के सभी भाइयों की छवि देखें जिससे वह किसी भी समय अपने किसी भी भाई से सहायता मांग सके तो शायद ऐसा करके हम समाज में लड़कियों पर होने वाले अत्याचारों का डर समाप्त कर सकेगे और हर भाई भी अपनी बहन के लिए परेशान ना होगा क्योंकि रक्षाबंधन अर्थात रक्षासूत्र किसी एक को नहीं बल्कि सभी भाई- बहिनों को एक सूत्र में बांधने का पवित्र पर्व है।

Childhood 😊

Childhood
In a man’s life childhood is a golden period. Even though his whole life is divided into many parts pre-childhood, childhood, teenage, adult, young and old and every period has its own significance but childhood is the best period in it. In this period a child has no responsibility,no work & no tension. He has to only play,eat and sleep. All the family members remain wandering around him. In this age he became sad soon but in a short moment when somebody gives him a toy and any pleasing thing he becomes happy soon. This age is regarded as best because at this time he is truthful, he is completely away from the cheating, evils and every wrong way.
He knows nothing about the materialistic life that is only depend upon you that what kind of environment you give him.
William Wordsworth truly said about a child that“A child is father of man.” He has no sense of truth and lie as if you told him to tell a lie that you are not present,he will say that you are saying that you are not present. They know only to tell the truth that’s why they are supposed as the form of God.
In this age the child is just like Clay and the parents are the Potter so that’s depend on you that how would you mould them.
This is one of the best part of lives because there is only enjoyment and happiness. In this age we can do anything,we can go anywhere and we can get anything. The elder people also forgive us easily for any mistake.Every old person wants to be child again because when he reaches in this age,he realises that how many wrong deeds he has done in his life and when he was a child,he was far from all these evils. But now we cannot do anything because‘ lost time never comes again’ .Thus we can say that we should try to fill our children’s childhood with sweet memories because our childhood memories are never lasting and they will inspire you to do good deeds in your life.

आया सावन झूम के!!


आया सावन देखो सखियों ये मन को हर्षाए,
डाल- डाल पर कोयल बोले मनवा नाचे गए।
मनवा हिलोरे खाता सबका बागों के झूलों पर ,
मोर नाचता देखो सखियों मोहन की वंशी पर।
सज-धज तीज मनाती देखो गौरा को मनाये,
और शिव जी से अचल सौभाग्य का वर पाये।
झूम रही है डाली – डाली सावन के गीतों पर,
बांध रही है देखो राखी भईया के हाथों पर।
करेंगे रक्षा सभी बहन की देते आज वचन हैं,
इस धागे की खातिर उठते वीरों के शव हैं।
भेज हुमायूं को एक धागा जिसने रीत चलाई,
जग में भाई – बहन के अमर प्रेम की गाथा गाई।
साथ भले ही छूटे , प्रीत न उनकी टूटे,
कभी न एक बहन से उसका भाई रूठे।
जब – जब आये पर्व ये सबके मन को भाये,
और हरियाली सावन की जीवन से कभी न जाये ।

Women are better administrator than Men. Why?


It is not a comment but it’s a truth that women are better administrator than men because from the childhood they are taught to manage their house and family members.School education is not necessary for them but home management and household work is very necessary and compulsory.They ever told that they have to compromise,they have to adjust because they are women.This is not happen with our daughters even though their mother and grandmothers also followed these instructions and daughters are the link of this chain. They are told that their mother and grandmother proved a good administrator.So they also have to prove a good manager and they accepted it as a challenge and at any cost they want to manage their home in the best way. Though in present scenario they are mostly working but they handle both house and office effectively. Their childhood guideline help them in the work place also. They never want to yield before the circumstances and never accept defeat in any field when they go outside to do work , they have to accept another challenge that now how they will manage their home and work but they win this challenge and prove better administrator than men and this is only because of their home management education,so we should enhance our boys to manage home because home belongs not only to girls and they both are complements of each other.
I am not saying that men can’t do household work or they are not able to take this responsibility but it’s Indian Society’s thought if one person co-operate or support his wife or mother in doing domestic work , other people think him inferior and always talk about him as if he does any wrong work , So I request all the people that both men and women are necessary for the development of world so we have to understand  and cooperate each other.

#1Hindi Poem ” वृक्ष और जीवन”


नन्हा सा एक बीज जो मैंने बचपन में बोया था,
उसके जैसे मैंने हर एक मौसम को झेला था।
जब-जब उसमें हरकत होती,नई उमंग भर जाती।
और हरियाली उसकी मेरे तन-मन को हर हर्षाती।
पृथ्वी की गोदी में सोया बीज वो जाग गया था,
उसी बीज से एक नया अंकुर फूट गया था।
नई कोपले उसकी मेरे जीवन की राहें थी,
जिस पर मुझको चलते-चलते खुशियां पा लेनी थी।
तूफानों से लड़ते-लड़ते बढ़ता पेड़ गया था,
और अंधेरे में भी हरदम मुस्काता था।
हर सुख-दुख को सहना उससे मैंने सीख लिया था,
और तन्हाई में उसको अपना साथी बना लिया था।
जब हो जाती मैं मायूस हिम्मत वो देता था,
और नई चेतना वो मुझमें भर देता था।
लेकिन घूमा समय का पहिया सब कुछ पलट गया था।
अंतिम पड़ाव के नजदीक अब वो आ गया था,
एक थपेड़ा ऐसा आया पेड़ वो सूख गया था।
सारे रिश्ते नातों से नाता तोड़ गया था,
लेकिन जाते-जाते उसने सीख यह मुझको सिखलाई।
और जीने की नई दिशा है दिखलाई,
फिर होगी एक नई सुबह दिन वह आएगा।
उस पौधे की जगह एक नया बीज रोपेगा।
अंजू वैश्य

भारत और भारतीय संस्कृति 🇨🇮

भारत एक ऐसा समर्थ देश है जिसका नाम महाराज भरत के नाम पर पड़ा , जिसकी संस्कृति और सभ्यता इतनी महान और प्राचीन है जिसमें चारों वेद,काव्य महाकाव्य,ग्रंथ और उपनिषद समाए हुए हैं।इसकी सभ्यता और मर्यादा को बनाए रखने के लिए राम,कृष्णा महात्मा बुद्ध,महावीर स्वामी,शिवाजी,गार्गी, अनुसुइया जैसी अनेक महान नारियों और महापुरुषों ने जन्म लिया। भारत केवल इन महान नारियों और महापुरुषों की जन्म भूमि ही नहीं बल्कि कर्मभूमि भी है। भारत एक ऐसा देश है जिसमें प्रत्येक धर्म और मजहब का सम्मान किया जाता है जिसमें प्रत्येक व्यक्ति की इच्छा और भावनाओं को समझा जाता है। जिसमें रिश्तो की मर्यादा को लांघने वाले को पापी और निंदनीय कहा जाता है। जहां हमेशा त्योहारों को मिलकर धूमधाम से मनाया जाता है।
भारत और भारत की संस्कृति बहुत महान है यहां एक बार आने वाले के मन में यहां की संस्कृति रंग चढ़ा देती है जिसे उतारना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है।