मै भी कोरोना वॉरियर # शिक्षक

“वक्त की रेत पर कुछ निशा रह जायेंगे
कुछ राह गुजर चलते है चलते जायेंगे”

कोरोना जैसी महामारी के समय देश के भविष्य अर्थात हमारे बच्चों को बचाने का काम देश के चिकित्सक बखूबी कर रहे हैं लेकिन उनको आगे बढ़ाने और पढ़ाने का काम तो हम शिक्षक ही कर रहे हैं वहीं शिक्षक जो देश के भविष्य के निर्माण करता है लेकिन कुछ लोगों को लगता है कि घर पर बैठकर पढ़ाना आसान है पर,उन्हें क्या पता विद्यालय में तो सिर्फ हम शिक्षकों को केवल छात्र छात्र हम शिक्षकों को केवल छात्र देखता है और हमारी क्रियाओं का अवलोकन करता है लेकिन ऑनलाइन में प्रतिक्षण शिक्षक को छात्र के माता-पिता और परिवारी जनों द्वारा मूल्यांकित किया जाता है विद्यालय में जाकर छात्रों को शिक्षित करने और ऑनलाइन शिक्षित करना कोई छोटी बात नहीं है कुछ शिक्षक इस नए दौर के तकनीकी शिक्षण से अनभिज्ञ होते हुए भी इस नए दौर की तकनीकी शिक्षा को अपने शिक्षण में अपना रहे हैं और छात्रों को शिक्षित कर रहे हैं।

शिक्षक कभी बुरे नहीं होते, ये केवल उनके पढ़ाने का तरीका होता है जो एक-दूसरे से अलग होता है और विद्यार्थियों के दिमाग में उनकी अलग छवि बनाता है। शिक्षक केवल अपने विद्यार्थियों को खुश और सफल देखना चाहते हैं। एक अच्छा शिक्षक कभी अपना धैर्य नहीं खोता और हर विद्यार्थी के अनुसार पढ़ाता है।


जो लोग यह कहते हैं कि हम देश की भविष्य और लोगों की जान बचाकर एक अच्छा काम कर रहे हैं और हम कोरोना वरियर हैं ,तो क्या वे लोग जो उस भविष्य को खोलना के प्रति सजग करके और उनके जीवन के नए मूल्य मूल मंत्र को सिखाने वाले शिक्षक किसी से कम है या वह कोरोनावरियर्स नहीं है उन्हें भी कोरोनावरियर्स कहलाने का अधिकार है, जो अपने हर काम को डालकर किसी भी परिस्थिति में रिचार्ज करा कर ऑनलाइन कक्षाओं की सुविधा प्रदान कर रहे हैं और मैं भी गर्व से कह सकती हूं कि मैं भी हूं कोरोना वॉरियर।

-अंजू वैश्य (एक शिक्षक की कलम से)

पेश है मशहूर खमन ढोकला

ढोकला ,यह भारत में मशहूर रेसिपी है और गुजरात राज्य में नाश्ते में खाई जाती है। अगर आप भी ढोकला बना कर खाना चाहते हैं तो मै यहां आपको ढोकला बनाने की विधि बता रही हूं। इस विधि को पढ़ने के बाद किसी से यह नहीं पूछना पड़ेगा कि ढोकला रेसिपी कैसे बनाते हैं? ढोकला कैसे बनाया जाता है?

जब नाश्ते के समय भूख लगे या बच्चों के स्कूल टिफिन पर नाश्ता बनाना हो या सफर में नाश्ता साथ ले जाना हो तो इस समय घर पर ढोकला बना सकते हैं। इस तरीके से इसे बनाओगे तो बहुत ही सॉफ्ट और स्पंजी बनेगा जो सभी को पसंद आएगा। बस आपको ज्यादा मेहनत की जरूरत नहीं, थोड़ी ही देर में इसे बना कर खा सकते हैं।





इसे बनाना कोई मुश्किल काम नहीं अगर इस विधि को ध्यान से पढ़ लिया तो अपने घर पर सॉफ्ट और स्पंजी ढोकला रेसिपी बना सकते हैं। तो चलिए देर ना करते हुए ढोकला बनाने की विधि सीख लेते हैं। बहुत ही कम सामग्री चाहिए ढोकला बनाने के लिए, यह सामग्री आमतौर पर घर में ही मौजूद होती है बाहर से खरीद लाने की जरूरत नहीं पड़ती।

ढोकला बनाने की सामग्री


बेसन – 200 ग्राम

दही – 150 ग्राम

नींबू का रस एक चम्मच

तेल एक चम्मच

स्वादानुसार नमक

बेकिंग सोडा एक छोटी चम्मच

हल्दी पाउडर एक छोटी चम्मच

तड़का लगाने के लिए:

तेल एक चम्मच

हरी मिर्च 7-8 (लंबी कटी हुई)

करी पत्ते – 10-12

राई एक चम्मच

चीनी एक चम्मच

सजाने के लिए:

हरा धनिया 1 कप

ढोकला बनाने की विधि


एक बाउल में बेसन को छान लें। अब इसमें दही, नमक, हल्दी पाउडर, 1 चम्मच तेल और नींबू का रस डालकर 1 मिनट मिला लें। अब थोड़ा-थोड़ा करके पानी मिलाएं और स्मूथ बेटर बना ले (बेटर ना ज्यादा पतला या ना ज्यादा गाढ़ा हो) अब आधे घंटे के लिए बेटर को सेट होने के लिए साइड में रख दे।






बेटर सेट हो रहा है तब तक आगे की तैयारी करते हैं। पहले एक कटोरे में तेल लगाकर ग्रीस कर ले ताकि तले में ढोकला चिपके नहीं। अब एक कड़ाही में दो कटोरी पानी डाले और स्टैंड रख दें। अब हाई टू मीडियम आंच पर पानी को उबाल आने तक गर्म करें।

अब बेसन के बेटर को एक बार चम्मच से और घुमा ले। अब इस बेटर में बेकिंग सोडा डालें और एक छोटी चम्मच पानी डालकर बेटर को 1 मिनट घुमाए। अब आप देखेंगे कि बेटर फुल चुका है अब इसे तुरंत तेल से ग्रीस किए हुए बर्तन में डाले और कढ़ाई में स्टैंड पर इसे रख दें।






अब कढ़ाई के ऊपर ढक्कन ढक्कर 15-20 मिनट पकाएं। तय समय बाद खोलें और चाकू गड़ा कर चेक करें। यदि चाकू साफ निकले तब समझिए ढोकला अच्छी तरह बन चुका है, यदि बेटर चाकू पे चिपक रहा हो तो दो-तीन मिनट और पकाएं। अब बर्तन को बाहर निकाले और थोड़ा ठंडा होने दें।

ठंडा होने के बाद चाकू से मीडियम टुकड़ों में ढोकले को काटे। ढोकला तैयार है अब तड़का लगाने के लिए तड़के वाली पैन में एक चम्मच तेल डालकर गरम करें। जब तेल गरम हो जाए तब राई, हरी मिर्च (लंबी कटी हुई), कड़ी पत्ते डालकर राई तड़कने तक भूनें। अब चीनी, 1 कप पानी डालकर चीनी घुलने तक पकाएं। अब इस तड़के को ढोकले के ऊपर डाले और हरा धनिया से सजाए। (ये है ढोकले की चटनी बनाने की आसान विधि)

ढोकला सर्व करने के लिए तैयार है इसे ढोकले वाली चटनी के साथ परोसे और यम्मी ढोकले का आनंद लें।

Happy Eating

जीजा जी, मै आपके साथ हूं बस पास नही


बात लगभग कल रात एक बजे की है,
जब सविता को पता चला की उसकी सबसे बड़ी ननद कोविड पॉजिटिव है , पता चलने के साथ ही परिवार में उदासी छा गई पर क्या था सविता ने सबको विश्वास दिलाया कि दीदी जल्द ही ठीक हो जाएगी और इसके सिवा सविता कहती भी तो क्या!
जैसे तैसे रात तो कट गई पर भोर होते ही सविता ने अपने नंदोई को फ़ोन किया ,
और जीजा जी दीदी कैसी है अब
ठीक ही हैं “ जीजा जी ने” धीमे स्वर मे कहा
बच्चे तो ठीक हैं न और आप कैसे है
हा अभी तक तो सब ठीक है,
इसी के साथ सविता के मुंह से कोई शब्द न निकला और उसने फ़ोन काट दिया और घर में सबको बता दिया कि दीदी के यहां सब ठीक हैं
अब सविता दोपहर के खाने की तैयारी में जुट गई और वह बार – बार अपनी ननद के बारे में ही सोच रही थी और उनको फ़ोन करने के लिए अपना दिल पक्का कर रही थी,
की अचानक सविता के नंदोई का फ़ोन आया और उन्होंने कहा कि अब ” उसकी ननद की तबियत ज्यादा बिगड़ गई है और अब उनको हॉस्पिटल में भर्ती किया है”
इस ख़बर को सुनते ही सविता का पति और सविता फूट फूट कर रोने लगे और सविता के पति ने कहा कि वो अब आगरा अपनी दीदी के पास जा रहा है,
ससुराल के रिश्तों के बीच उलझी सविता चुप चाप सुनती रही पर अब अपने पति के लिए भी डरने लगी थी आखिर बीमारी ही ऐसी ही, जिसने अपने अपनों को ही दूर कर दिया है
सविता मन ही मन बहुत परेशान भी थी और अपने पति को न भेजने के लिए राज़ी थी, आखिर उसने अपने पति को बहुत समझाया की हम सब दीदी के साथ है पर इस बीमारी के प्रकोप के कारण वह मै आपको नही भेजना चाहती , और न जाने कैसे पर सविता के पति ने न जाने का निश्चय किया ,
सविता ने एक बार फिर बड़ी मुश्किल से अपना दिल पक्का करके अपने नंदोई को फ़ोन किया,
और उसने कहा की जीजा जी आप बिलकुल परेशान मत होइये हम बस आपके पास नहीं हैं पर हम सब सदैव आपके साथ हैं और मुझे पक्का विश्वास है की दीदी जल्द ही स्वस्थ होगी हम सब के लिए अपने बच्चों के लिए, और हम सब जल्दी मिलेंगे बस अभी यह दुख की घड़ी है और जीजा जी आप बिलकुल परेशान मत होइये, आप पैसे की भी बिलकुल चिंता मत कीजिए हम सब है न
इसी के साथ सविता आज बहुत उदास थी कि बस एक बीमारी के कारण वह अपने अपनों से नही मिल पा रही , सविता आज बहुत मजबूर थी और दिन रात दुआ कर रही थी की बस दीदी जल्दी ठीक हो जाए और भगवान यह बीमारी जल्दी चली जाए, ताकि कोई भी अपनों से पल भर के लिए भी दूर न हो जैसे आज वह चाह कर भी अपनी ननद और नंदोई से मिल नही सकती।

जीजा जी , मै आपके साथ हूं बस पास नही


बात लगभग कल रात एक बजे की है,
जब सविता को पता चला की उसकी सबसे बड़ी ननद कोविड पॉजिटिव है , पता चलने के साथ ही परिवार में उदासी छा गई पर क्या था सविता ने सबको विश्वास दिलाया कि दीदी जल्द ही ठीक हो जाएगी और इसके सिवा सविता कहती भी तो क्या!
जैसे तैसे रात तो कट गई पर भोर होते ही सविता ने अपने नंदोई को फ़ोन किया ,
और जीजा जी दीदी कैसी है अब
ठीक ही हैं “ जीजा जी ने” धीमे स्वर मे कहा
बच्चे तो ठीक हैं न और आप कैसे है
हा अभी तक तो सब ठीक है,
इसी के साथ सविता के मुंह से कोई शब्द न निकला और उसने फ़ोन काट दिया और घर में सबको बता दिया कि दीदी के यहां सब ठीक हैं
अब सविता दोपहर के खाने की तैयारी में जुट गई और वह बार – बार अपनी ननद के बारे में ही सोच रही थी और उनको फ़ोन करने के लिए अपना दिल पक्का कर रही थी,
की अचानक सविता के नंदोई का फ़ोन आया और उन्होंने कहा कि अब ” उसकी ननद की तबियत ज्यादा बिगड़ गई है और अब उनको हॉस्पिटल में भर्ती किया है”
इस ख़बर को सुनते ही सविता का पति और सविता फूट फूट कर रोने लगे और सविता के पति ने कहा कि वो अब आगरा अपनी दीदी के पास जा रहा है,
ससुराल के रिश्तों के बीच उलझी सविता चुप चाप सुनती रही पर अब अपने पति के लिए भी डरने लगी थी आखिर बीमारी ही ऐसी ही, जिसने अपने अपनों को ही दूर कर दिया है
सविता मन ही मन बहुत परेशान भी थी और अपने पति को न भेजने के लिए राज़ी थी, आखिर उसने अपने पति को बहुत समझाया की हम सब दीदी के साथ है पर इस बीमारी के प्रकोप के कारण वह मै आपको नही भेजना चाहती , और न जाने कैसे पर सविता के पति ने न जाने का निश्चय किया ,
सविता ने एक बार फिर बड़ी मुश्किल से अपना दिल पक्का करके अपने नंदोई को फ़ोन किया,
और उसने कहा की जीजा जी आप बिलकुल परेशान मत होइये हम बस आपके पास नहीं हैं पर हम सब सदैव आपके साथ हैं और मुझे पक्का विश्वास है की दीदी जल्द ही स्वस्थ होगी हम सब के लिए अपने बच्चों के लिए, और हम सब जल्दी मिलेंगे बस अभी यह दुख की घड़ी है और जीजा जी आप बिलकुल परेशान मत होइये, आप पैसे की भी बिलकुल चिंता मत कीजिए हम सब है न
इसी के साथ सविता आज बहुत उदास थी कि बस एक बीमारी के कारण वह अपने अपनों से नही मिल पा रही , सविता आज बहुत मजबूर थी और दिन रात दुआ कर रही थी की बस दीदी जल्दी ठीक हो जाए और भगवान यह बीमारी जल्दी चली जाए, ताकि कोई भी अपनों से पल भर के लिए भी दूर न हो जैसे आज वह चाह कर भी अपनी ननद और नंदोई से मिल नही सकती।

बेटियां किसी से कम नहीं…. बात उन दिनों की है जब नीरा स्कूल में पढ़ने जाया करती थी और नीरा को भी लड़कों की तरह स्पोर्ट्स शूज़ पहनना और उन्हें पहन कर रेस में दौड़ना बहुत पसंद था और वो एक धावक बनना चाहती थी। परंतु उसके पिता को यह सब बिल्कुल पसंद ना था जबकि उसकी मां हमेशा उसे प्रोत्साहित करती थी कुछ समय तक तो छुपते-छुपाते वह दौड़ती रही और मेडल जीतती रही परंतु जब उसके पिता को पता चला, तो उन्होंने उसके स्पोर्ट्स शूज फेंक दिए और कहा “यह सब लड़कियों के बस की बात नहीं है” किंतु एक दिन जब उसके पिता को अचानक अस्पताल में भर्ती कराया गया और पैसों की जरूरत हुई तब उसी बेटी ने अपने गोल्ड मेडल बेचकर पैसे जमा किए और अपने पिता की जान बचाई उस दिन उसके पिता को समझ में आया कि मेरी बेटी कितनी योग्य और काबिल है उसके बाद उन्होंने स्वयं अस्पताल से आने के बाद उसे स्पोर्ट्स शूज ला कर दिए और उसके लिए खेलने के लिए प्रोत्साहित किया।

क्यों निराश हुआ जाए?

हर अंधेरे को पार कर जाऊंगी, बादलों का सीना चीर जाऊंगी; जो करदे रोशन मेरे इस जहां को, ‘मैं’ वो चांद ढूंढ लाऊंगी।                     – अंजू वैश्य

वो जीत के 21 साल……..

शत शत नमन है उन वीरों को जिसने खून बहाया। कारगिल विजय दिलाकर भारत का मान बढ़ाया।। 

कारगिल विजय दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं एवम् बधाई। वन्दे मातरम् 🙏

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