बेटियां किसी से कम नहीं…. बात उन दिनों की है जब नीरा स्कूल में पढ़ने जाया करती थी और नीरा को भी लड़कों की तरह स्पोर्ट्स शूज़ पहनना और उन्हें पहन कर रेस में दौड़ना बहुत पसंद था और वो एक धावक बनना चाहती थी। परंतु उसके पिता को यह सब बिल्कुल पसंद ना था जबकि उसकी मां हमेशा उसे प्रोत्साहित करती थी कुछ समय तक तो छुपते-छुपाते वह दौड़ती रही और मेडल जीतती रही परंतु जब उसके पिता को पता चला, तो उन्होंने उसके स्पोर्ट्स शूज फेंक दिए और कहा “यह सब लड़कियों के बस की बात नहीं है” किंतु एक दिन जब उसके पिता को अचानक अस्पताल में भर्ती कराया गया और पैसों की जरूरत हुई तब उसी बेटी ने अपने गोल्ड मेडल बेचकर पैसे जमा किए और अपने पिता की जान बचाई उस दिन उसके पिता को समझ में आया कि मेरी बेटी कितनी योग्य और काबिल है उसके बाद उन्होंने स्वयं अस्पताल से आने के बाद उसे स्पोर्ट्स शूज ला कर दिए और उसके लिए खेलने के लिए प्रोत्साहित किया।

वो जीत के 21 साल……..

शत शत नमन है उन वीरों को जिसने खून बहाया। कारगिल विजय दिलाकर भारत का मान बढ़ाया।। 

कारगिल विजय दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं एवम् बधाई। वन्दे मातरम् 🙏

रिश्ता वहीं,सोच नई 💕

रक्षाबंधन का वो पर्व जो भाई बहन के प्रेम का प्रतीक है।इस दिन हर बहन अपने भाई की कलाई पर राखी का धागा इस आशा और विश्वास के साथ बांधती है कि उसका भाई किसी भी परेशानी में और जीवन के हर मोड़ पर सहायता करेगा और हर भाई भी एक ज़िम्मेदार व्यक्ति होने के नाते अपनी हर बहन को यह वचन देता है और अपनी बहन से यह उम्मीद करता है की वह आपने जीवन के हर राज में उसे शामिल करेगी।लेकिन आज के दौर मे सामाजिक बुराइयां इतनी बढ़ गई हैं कि हर भाई और बहन परेशान है और इसके लिए हम ही ज़िम्मेदार हैं क्योंकि कभी – कभी समाज के डर से लड़कियां अपने भाइयों से बातें छिपाती हैं साथ ही कुछ भाई जो मान- सम्मान अपनी बहनों को देते है वह दूसरी लड़कियों को नहीं। अतः इस राखी मेरा यही निवेदन है कि हर भाई राखी बंधवाते समय उस बहन में देश की सभी बहेनों की छवि देखें और हर बहन अपने भाई में देश के सभी भाइयों की छवि देखें जिससे वह किसी भी समय अपने किसी भी भाई से सहायता मांग सके तो शायद ऐसा करके हम समाज में लड़कियों पर होने वाले अत्याचारों का डर समाप्त कर सकेगे और हर भाई भी अपनी बहन के लिए परेशान ना होगा क्योंकि रक्षाबंधन अर्थात रक्षासूत्र किसी एक को नहीं बल्कि सभी भाई- बहिनों को एक सूत्र में बांधने का पवित्र पर्व है।

Childhood 😊

Childhood
In a man’s life childhood is a golden period. Even though his whole life is divided into many parts pre-childhood, childhood, teenage, adult, young and old and every period has its own significance but childhood is the best period in it. In this period a child has no responsibility,no work & no tension. He has to only play,eat and sleep. All the family members remain wandering around him. In this age he became sad soon but in a short moment when somebody gives him a toy and any pleasing thing he becomes happy soon. This age is regarded as best because at this time he is truthful, he is completely away from the cheating, evils and every wrong way.
He knows nothing about the materialistic life that is only depend upon you that what kind of environment you give him.
William Wordsworth truly said about a child that“A child is father of man.” He has no sense of truth and lie as if you told him to tell a lie that you are not present,he will say that you are saying that you are not present. They know only to tell the truth that’s why they are supposed as the form of God.
In this age the child is just like Clay and the parents are the Potter so that’s depend on you that how would you mould them.
This is one of the best part of lives because there is only enjoyment and happiness. In this age we can do anything,we can go anywhere and we can get anything. The elder people also forgive us easily for any mistake.Every old person wants to be child again because when he reaches in this age,he realises that how many wrong deeds he has done in his life and when he was a child,he was far from all these evils. But now we cannot do anything because‘ lost time never comes again’ .Thus we can say that we should try to fill our children’s childhood with sweet memories because our childhood memories are never lasting and they will inspire you to do good deeds in your life.

आया सावन झूम के!!


आया सावन देखो सखियों ये मन को हर्षाए,
डाल- डाल पर कोयल बोले मनवा नाचे गए।
मनवा हिलोरे खाता सबका बागों के झूलों पर ,
मोर नाचता देखो सखियों मोहन की वंशी पर।
सज-धज तीज मनाती देखो गौरा को मनाये,
और शिव जी से अचल सौभाग्य का वर पाये।
झूम रही है डाली – डाली सावन के गीतों पर,
बांध रही है देखो राखी भईया के हाथों पर।
करेंगे रक्षा सभी बहन की देते आज वचन हैं,
इस धागे की खातिर उठते वीरों के शव हैं।
भेज हुमायूं को एक धागा जिसने रीत चलाई,
जग में भाई – बहन के अमर प्रेम की गाथा गाई।
साथ भले ही छूटे , प्रीत न उनकी टूटे,
कभी न एक बहन से उसका भाई रूठे।
जब – जब आये पर्व ये सबके मन को भाये,
और हरियाली सावन की जीवन से कभी न जाये ।